प्रयागराज
अदालत द्वारा मुकदमा दर्ज किए जाने के आदेश का स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि एफआईआर दर्ज होने से जांच आगे बढ़ेगी और जांच पूरी होने के बाद सच्चाई स्वतः सामने आ जाएगी। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अदालत द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने के आदेश के बाद अपनी प्रक्रिया में यह भी कहा कि चूंकि इस मामले पर देशभर की नजर है, इसलिए जांच और न्यायिक प्रक्रिया को शीघ्र पूरा किया जाना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जांच में जो फर्जी होगा, वह फर्जी ही सिद्ध होगा। उनके अनुसार सनातन धर्म पर लगाए गए आरोप किसी “विधर्मी” द्वारा नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति द्वारा लगाए गए हैं जो कथित तौर पर हिस्ट्रीशीटर है और जिसकी हिस्ट्रीशीट थाने में दर्ज है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि उक्त व्यक्ति का काम ही फर्जी मुकदमे दर्ज करा कर धन उगाही करना है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यह भी कहा कि वही व्यक्ति बाद में रामभद्राचार्य का शिष्य बन जाता है और फिर उन्हीं पर आरोप लगाने लगता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि आरोप किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा नहीं लगाए जा रहे हैं। उन्होंने गोवंश हत्या से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें दबाने के प्रयास किए जा रहे हैं और वर्तमान मुकदमा भी उसी कड़ी का एक प्रयास हो सकता है। उन्होंने कहा कि आरोप लगाने वाले व्यक्ति ने दो हलफनामे लगाए हैं, जिनमें से एक फर्जी है। ऐसे में यह मामला स्वतः ही उनके पक्ष में जाता है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, “चिंता उन्हें करनी चाहिए जिन्होंने फर्जी मुकदमा किया है। हमारे ऊपर जो भी आरोप लगे हैं, हम एक आम आदमी की तरह खुलकर उनका सामना करेंगे।” अंत में उन्होंने कहा कि वे योगी आदित्यनाथ नहीं हैं कि अदालत से यह अपील करें कि उनके ऊपर से मुकदमा हटा लिया जाए। उनका मानना है कि निष्पक्ष जांच ही इस पूरे मामले का सही समाधान है।





