लखनऊ
सरकारी गलियारों में इन दिनों एक अनोखी प्रेम-कहानी की चर्चा है, जिसका अंत फिल्मों की तरह नहीं बल्कि सरकारी आदेश से हुआ। उत्तर प्रदेश सचिवालय के अनुभाग अधिकारी द्वारिका प्रसाद को आखिरकार दो शादियों का शौक महंगा पड़ गया और सरकार ने उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया।
कहते हैं साहब ने सोचा था कि सरकारी फाइलों की तरह शादी भी “डुप्लीकेट कॉपी” में चल जाएगी। लेकिन पहली पत्नी ने इस फाइल पर ऐसी आपत्ति लगाई कि मामला सीधे जांच की टेबल तक पहुंच गया।
सूत्र बताते हैं कि दूसरी पत्नी भी सरकारी सेवा में हैं और राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश में तैनात हैं। यानी घर में भी “सरकारी मीटिंग” और दफ्तर में भी “घरेलू एजेंडा” चलता रहा।
मामला नया नहीं था। 2015 से इसकी जांच चल रही थी। इतने सालों में कई फाइलें पलटी गईं, नोटिंग लिखी गई, और आखिरकार सरकार ने फैसला सुनाया— “सरकारी नौकरी एक ही, लेकिन शादियां दो… नियमों में यह ‘डबल एंट्री’ मान्य नहीं।”
अब सचिवालय के गलियारों में लोग मजाक कर रहे हैं कि साहब को लगा होगा कि सरकारी सेवा में “दो पत्नी योजना” भी किसी कल्याणकारी योजना की तरह चल जाएगी, पर अफसोस—यह योजना बजट पास होने से पहले ही रद्द हो गई।





