लखनऊ
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में महिला डॉक्टर के साथ कथित यौन शोषण और धर्मांतरण के मामले को लेकर सियासत और बयानबाजी तेज हो गई है। राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने केजीएमयू प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आरोपी डॉक्टर पर समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं की गई, जिससे एक मासूम को अत्याचार का शिकार होना पड़ा।
शुक्रवार को केजीएमयू परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए अपर्णा यादव ने कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद पर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि जब पीड़िता ने राज्य महिला आयोग जाने की बात कही तो उसे ऐसा करने से मना किया गया, जो पूरी तरह गलत है। अपर्णा यादव ने सवाल उठाया कि क्या राज्य महिला आयोग कोई संवैधानिक संस्था नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुलपति ने उनसे मुलाकात करने से इनकार कर दिया।
वहीं, अपर्णा यादव के आरोपों पर केजीएमयू प्रशासन ने प्रेस कांफ्रेंस कर अपना पक्ष रखा। कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने कहा कि महिला आयोग की उपाध्यक्ष द्वारा लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं। उन्होंने दावा किया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले में सबसे कम समय में कार्रवाई की है और विशाखा समिति की रिपोर्ट आने के बाद आरोपी डॉ. रमीज मलिक को बर्खास्त करने की सिफारिश की गई है।
कुलपति ने यह भी कहा कि अपर्णा यादव ने बिना अनुमति के केजीएमयू में प्रेस कांफ्रेंस की और उनके साथ आए लोगों ने हंगामा किया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष से भी बात की गई, जिनका कहना था कि आयोग का काम धरना-प्रदर्शन करना नहीं है।
फिलहाल, यह मामला प्रशासन और राज्य महिला आयोग के बीच टकराव का रूप लेता दिख रहा है, जबकि पीड़िता को न्याय दिलाने की प्रक्रिया पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।







