लखनऊ से श्रीनरायन गुप्ता
खाद की कमी और कालाबाजारी की आशंका को देखते हुए प्रदेश सरकार ने सीमावर्ती जिलों में विशेष निगरानी शुरू कर दी है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार सात नवंबर तक प्रदेश में 38.15 लाख मीट्रिक टन खाद पहुंच चुकी है। इसमें से 13.15 लाख टन का वितरण हो चुका है, जबकि 25 लाख टन उर्वरक अभी उपलब्ध है। इसके बावजूद कुछ क्षेत्रों में कालाबाजारी की संभावनाओं को देखते हुए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
खरीफ सीजन में भी कई जिलों में खाद वितरण में गड़बड़ी सामने आई थी। इस बार ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर और महाराजगंज जिलों में विशेष निगरानी के लिए अधिकारियों की टीमें लगाई गई हैं। स्थानीय अधिकारियों को भी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
विभाग उन जिलों की सूची भी तैयार कर रहा है, जहां पिछले वर्षों की तुलना में खाद की खपत में असामान्य बढ़ोतरी देखी गई है। झांसी और ललितपुर से ऐसी रिपोर्ट आई है, जहां कई किसानों को अप्रैल से अब तक एक-एक टन से अधिक खाद वितरित की गई है। इस पर कार्रवाई करते हुए कृषि निदेशक डॉ. पंकज त्रिपाठी ने जांच टीमों का गठन किया है। झांसी में संयुक्त कृषि निदेशक योगेश कुमार सिंह, उप कृषि निदेशक आशीष कुमार सिंह और ब्रजेश सिंह की टीम जांच करेगी, जबकि ललितपुर में अपर कृषि निदेशक (चावल) ब्रजेश चंद्र, संयुक्त कृषि निदेशक अनिल यादव और उप कृषि निदेशक धर्मेंद्र यादव की टीम को जिम्मेदारी दी गई है।





