जालौन
स्वास्थ्य विभाग की कथित लापरवाही का मामला सामने आया है। जिले के डाकोर निवासी भानुप्रताप की पत्नी भूरी की वर्ष 2023 में सरकारी अस्पताल में नसबंदी कराई गई थी। स्वास्थ्य विभाग ने नसबंदी को पूरी तरह सफल बताया था, लेकिन इसके करीब डेढ़ साल बाद भूरी ने एक बच्चे को जन्म दिया।
भानुप्रताप का कहना है कि आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने दो बच्चों के बाद नसबंदी का फैसला लिया था। वह राजमिस्त्री का काम करते हैं और परिवार की स्थिति कमजोर है। तीसरे बच्चे के जन्म से उनकी परेशानियां बढ़ गई हैं। दंपति का आरोप है कि शिकायत के बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने कोई सुनवाई नहीं की।
शुक्रवार को भानुप्रताप अपनी पत्नी के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और मांगपत्र सौंपा। जिलाधिकारी ने मामले की जांच के आदेश सीएमओ को दिए हैं। दंपति ने सरकार से बच्चे के पालन-पोषण के लिए आर्थिक सहायता देने की मांग की है।






