प्रयागराज
ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद माघ मेला प्रशासन की ओर से जारी दो नोटिस, मेले से बैन करने और जमीन व सुविधाओं का आवंटन रद्द करने की धमकियों के बावजूद अपने रुख पर पूरी तरह अडिग हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वे किसी के “टुकड़ों पर पलने वाले” नहीं हैं और प्रशासन चाहे तो उनका आवंटन रद्द कर सकता है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, “जब तक प्रशासन माफी नहीं मांग लेता और ससम्मान संगम स्नान नहीं करा देता, तब तक हम शिविर में प्रवेश नहीं करेंगे। अगर इस साल शिविर प्रवेश नहीं हुआ तो हम लौट जाएंगे और अगले साल फिर आएंगे, लेकिन ऐसे ही बाहर पालकी पर बैठे रहेंगे, जहां पुलिस प्रशासन ने हमें मौनी अमावस्या के दिन छोड़ दिया था।”
उन्होंने आरोप लगाया कि माघ मेला प्रशासन नहीं चाहता कि वे त्रिवेणी संगम में स्नान करें, इसलिए वे उसी स्थान पर बैठे हैं जहां पुलिस उन्हें छोड़कर गई थी।
दो नोटिस, दोनों का दिया जवाब
———————————
शंकराचार्य ने बताया कि प्रशासन की ओर से अब तक उन्हें दो नोटिस भेजे गए हैं। पहली नोटिस में उनसे यह प्रमाणित करने को कहा गया कि वे शंकराचार्य कैसे हैं, जिसका उन्होंने प्रमाण सहित जवाब दे दिया। दूसरी नोटिस में उन्हें मेला क्षेत्र से सदा के लिए वर्जित करने और आवंटित भूमि व सुविधाएं वापस लेने की बात कही गई।
इस पर उन्होंने कहा, “आपने जो भूखंड और सुविधाएं दी हैं, उन्हें आप निरस्त कर सकते हैं। हमें कोई आपत्ति नहीं है। आपने सम्मान से दिया था तो हमने स्वीकार किया। अगर आपको लगता है कि आवंटन गलत था तो आप वापस ले लीजिए, लेकिन आपको यह बताना होगा कि देना गलत था या लेना गलत।”
केशव प्रसाद मौर्य के बयान पर टिप्पणी
—————————————-
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि केशव मौर्य में यह समझ है कि प्रशासन से गलती हुई है और ऐसे समझदार व्यक्ति को ही उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री होना चाहिए। शंकराचार्य के इस सख्त और भावनात्मक रुख ने माघ मेला प्रशासन और सरकार के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।







