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रामकथा के मंच से दहाड़े राजन महाराज—‘किसने मां का दूध पिया है, गोली मारकर दिखाओ’  

गोरखपुर

शहर में चल रही प्रसिद्ध कथावाचक राजन जी महाराज की रामकथा उस समय विवाद का केंद्र बन गई, जब कथा स्थल पर मंच पर चढ़ने को लेकर हंगामा हो गया। मामूली कहासुनी देखते ही देखते गंभीर तनाव में बदल गई और कथावाचक की टीम को कथित तौर पर गोली मारने की धमकी तक दे दी गई।

घटना कथा के दौरान उस वक्त हुई, जब कुछ लोग बिना अनुमति मंच पर चढ़ने का प्रयास करने लगे। राजन जी महाराज की टीम ने जब उन्हें रोका तो विवाद बढ़ गया। आरोप है कि इसी दौरान असामाजिक तत्वों ने टीम के एक सदस्य को जान से मारने की धमकी दी, जिससे माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया।

धमकी की सूचना मिलते ही राजन जी महाराज भावुक और आक्रोशित नजर आए। मंच से उन्होंने कड़े शब्दों में कहा—

“किसने मां का दूध पिया है, गोली मारकर दिखाओ।”

उनका यह बयान सुनते ही पंडाल में सन्नाटा छा गया और श्रद्धालुओं में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

राजन जी महाराज ने घटना से आहत होकर कथा को बीच में ही छोड़ने और गोरखपुर से प्रस्थान करने की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि जहां कथा और कथावाचक की सुरक्षा नहीं है, वहां कथा करना संभव नहीं।

श्रद्धालुओं ने संभाला माहौल

कथावाचक के जाने की घोषणा के बाद पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं और आयोजकों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। काफी देर तक मान-मनौव्वल का दौर चलता रहा। आयोजकों ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद राजन जी महाराज कथा जारी रखने के लिए सहमत हुए।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना ने धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि कथा जैसे पवित्र आयोजन में इस तरह की अराजकता बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। स्थानीय प्रशासन की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।

सूत्रों के अनुसार, घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित किया। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और यदि किसी ने धमकी दी है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि धार्मिक मंचों पर साधु-संतों की भाषा और तेवर इतने उग्र क्यों होते जा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि बढ़ती भीड़, अव्यवस्था और असामाजिक तत्वों की घुसपैठ इसके प्रमुख कारण हैं। फिलहाल, रामकथा शांतिपूर्वक जारी है, लेकिन गोरखपुर की यह घटना लंबे समय तक चर्चा में बनी रहने की संभावना है।

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