लखनऊ
प्रदेश में बिजली संकट एक बार फिर गहराता नजर आ रहा है। राज्य की 13 उत्पादन इकाइयों के बंद होने से करीब 5,940 मेगावाट बिजली उत्पादन ठप हो गया है। वहीं प्रदेश में बिजली की मांग 27,407 मेगावाट के पार पहुंच गई है। उत्पादन में कमी और बढ़ती मांग के बीच बिजली कटौती का असर अब आम उपभोक्ताओं पर दिखाई देने लगा है।
बताया जा रहा है कि मंगलवार को तीन और उत्पादन इकाइयां बंद हो गईं। कोयला खदान में जलभराव को इसके पीछे प्रमुख वजह बताया जा रहा है। उत्पादन इकाइयों के बंद होने से बिजली उपलब्धता प्रभावित हुई है और आने वाले दिनों में संकट और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 18 घंटे तक बिजली आपूर्ति का दावा किया जाता है, लेकिन कई इलाकों में उपभोक्ताओं को वास्तविकता में महज 10 से 12 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। लखनऊ समेत प्रदेश के कई जिलों में सोमवार से ही अघोषित कटौती शुरू होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। दिन और रात दोनों समय बिजली गुल होने से लोग परेशान हैं।
त्योहारों से ठीक पहले बिजली की मांग बढ़ने और उत्पादन इकाइयों के बंद रहने से संकट को लेकर चिंता बढ़ गई है। यदि बंद इकाइयों से उत्पादन जल्द बहाल नहीं हुआ और मांग इसी तरह बढ़ती रही तो आने वाले दिनों में कटौती का दायरा बढ़ सकता है।






