महोबा
खरेला कस्बे में फसल बर्बाद होने और कर्ज के दबाव के बीच एक किसान ने खेत में बने कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी। मंगलवार दोपहर तक किसान के घर नहीं पहुंचने पर परिजन उसे तलाशते हुए खेत पहुंचे। वहां कमरे में उसका शव फंदे से लटका मिला। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
मृतक की पहचान 52 वर्षीय हरगोविंद्र प्रजापति के रूप में हुई है। परिजनों का कहना है कि हरगोविंद्र ने कर्ज लेकर खरीफ की फसल बोई थी। इस वर्ष अत्यधिक बारिश के कारण खेतों में पानी भर जाने से फसल बर्बाद हो गई। इससे वह आर्थिक रूप से परेशान चल रहे थे। परिजनों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में फसल खराब होने के साथ ही कर्ज का बोझ भी बढ़ता गया था।
परिजनों ने आरोप लगाया कि साहूकारों की ओर से कर्ज चुकाने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा था, जिससे किसान मानसिक रूप से परेशान थे। हालांकि, पुलिस और प्रशासन का कहना है कि आत्महत्या के पीछे वास्तविक कारण जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। परिजनों ने परिवार में किसी तरह के विवाद या कलह से इनकार किया है।
अपर जिलाधिकारी इंद्र नंदन सिंह ने बताया कि जिले में बारिश से प्रभावित फसलों का सर्वे कराया जा रहा है। किसान की मौत के कारणों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही घटना की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।




