लक्ष्मीपुर से श्रीनरायन गुप्ता
भगवान बुद्ध के ननिहाल देवदह बनरसिहा कला में गुरु पूर्णिमा / अषाढ़ी पूर्णिमा के अवसर पर बुधवार को बौद्ध स्तूप पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें दूर दराज से आये बौद्ध धर्मावलंबियों ने बुद्ध वन्दना किया और बौद्ध स्तूप की पूजा अर्चना किया।
यह कार्यक्रम देवदह रामग्राम बौद्ध विकास समिति के तत्वावधान आयोजित किया गया। बौद्ध भिक्षुओं और उपासकों ने सबसे पहले प्राचीन बौद्ध स्थल की परिक्रमा किया। उसके बाद पूजा अर्चना किया।
कार्यक्रम मे बतौर मुख्य अतिथि भन्ते धम्मपाल ने कहा कि आषाढ़ पूर्णिमा को गुरू पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। राजकुमार सिद्धार्थ गौतम ने आषाढ़ पूर्णिमा के दिन 29 वर्ष की आयु में सांसारिक जीवन का त्याग किया था। आषाढ़ पूर्णिमा को धम्म चक्र प्रवर्तन दिवस भी कहा जाता है, क्योंकि सन् 528 इसवी पूर्व इसी दिन सारनाथ में सम्यक संबोधि प्राप्त करने के बाद बुद्ध ने पंचवर्गीय भिक्खुओं को प्रथम धम्म प्रवचन दे कर धम्म चक्र प्रवर्तन सूत्र की देशना की थी।
आषाढ़ी पूर्णिमा को बौद्ध धर्मावलंबियों द्वारा पूजा अर्चना करने के बाद बौद्ध भिक्षुओं को दान दिया जाता है। इस दिन का बौद्ध धर्म मे खास महत्व है। बौद्ध भिक्षु उत्तमानन्द ने कहा कि आषाढ़ी पुर्णिमा को राजकुमार सिद्धार्थ गर्भ धारण किए थे और इसी दिन महाभिनिष्क्रमण व गृह त्याग भी किये थे और सारनाथ में ज्ञान देकर धम्मचक्र प्रवर्तन की शुरुआत भी किये थे। देवदह रामग्राम बौद्ध विकास समिति के अध्यक्ष जितेंद्र राव ने कहा कि आगामी 14 अक्टूबर को बनरसिहा कला देवदह में विशाल बौद्ध सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।जिसके लिए तैयारियां शुरू कर दी गई है। जिसमें देश विदेश के बौद्ध भिक्षुओं का आगमन होगा।कार्यक्रम का संचालन समिति के अध्यक्ष जितेंद्र राव ने किया। धर्मावलंबियों को त्रिशरण पंचशील पूजा वंदना भन्ते धर्मपाल ने कराया। इस अवसर पर बौद्ध भिक्षु धम्मपाल, महिपाल, महानाम, कौटिल्य, उत्तमानन्द, बौद्ध उपासक जयरामकोली, रामललित गौतम, बीपी भारती, अनिल गौतम, नन्दलाल गौतम, रोहित गौतम, सुग्रीव कुमार, मंगल प्रसाद, चन्द्रभूषण, सन्तराम, डॉ प्रभु, हरिश्चंद्र चौधरी, रामबचन, रमेश आजाद, तारा, डॉ गौरीशंकर, रामलगन गौतम, रामललन, अर्जुन बौद्ध आदि उपस्थित रहे।





