ललखनऊ
उत्तर प्रदेश में करीब 47 लाख बिजली उपभोक्ताओं का विद्युत भार (लोड) कथित रूप से बिना पूर्व सूचना और सहमति के बढ़ाए जाने का मामला सामने आने के बाद उपभोक्ताओं में नाराज़गी बढ़ गई है। आरोप है कि इस कार्रवाई के कारण लाखों उपभोक्ताओं के मासिक बिजली बिल में अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
इस मामले को लेकर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। परिषद का कहना है कि किसी भी उपभोक्ता का स्वीकृत विद्युत भार बढ़ाने से पहले उसे विधिवत सूचना देना, कारण बताना और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उसकी सहमति लेना आवश्यक है। बिना पूर्व सूचना के लोड बढ़ाना उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है।
परिषद ने आयोग से मांग की है कि बिना निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए किए गए विद्युत भार वृद्धि के सभी मामलों की जांच कराई जाए और ऐसी कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही जिन उपभोक्ताओं का लोड बढ़ाया गया है, उन्हें इसकी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जाए तथा यदि इस कारण अतिरिक्त बिल जारी हुए हैं तो उन्हें उचित राहत प्रदान की जाए।
परिषद का कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो इसका सीधा असर लाखों परिवारों के मासिक बिजली खर्च पर पड़ेगा, जिससे आम उपभोक्ताओं पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
वहीं, इस पूरे मामले पर बिजली विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब सभी की निगाहें UPERC के रुख और संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं।






