प्रयागराज
नाम की स्पेलिंग में मामूली अंतर के कारण एक महिला को 45 वर्षों तक पारिवारिक पेंशन के लिए भटकना पड़ा। आखिरकार इलाहाबाद हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से उसे राहत मिली। न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान ने नगर निगम कानपुर के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए एक सप्ताह में मामले का निस्तारण करने का आदेश दिया। याची मंजू राय के पिता नगर निगम कर्मचारी थे, जिनका नाम रिकॉर्ड में “शिखर” और दस्तावेजों में “शेखर” दर्ज था। कोर्ट ने कहा कि हलफनामा, सक्सेशन सर्टिफिकेट और अन्य दस्तावेज स्पष्ट करते हैं कि दोनों नाम एक ही व्यक्ति के हैं। प्रशासनिक अड़चन अनुचित है।



