लखनऊ
उत्तर प्रदेश के चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस दाखिले के लिए लागू करीब 91 प्रतिशत आरक्षण व्यवस्था पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ की अंतरिम रोक के बाद नीट-यूजी काउंसलिंग की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। अब इन कॉलेजों में दाखिले अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लागू आरक्षण व्यवस्था के आधार पर किए जाएंगे। मामले को लेकर राज्य सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने की चर्चाएं भी तेज हैं, हालांकि सरकार की ओर से अपील दाखिल किए जाने की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
हाईकोर्ट ने 16 सितंबर को अंबेडकरनगर, कन्नौज, सहारनपुर और जालौन के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस दाखिले में करीब 91 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान पर रोक लगाई थी। कोर्ट ने काउंसलिंग जारी रखने की अनुमति देते हुए एससी के लिए 21 प्रतिशत, एसटी के लिए दो प्रतिशत और ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ाने को कहा था। हालांकि, काउंसलिंग के आधार पर होने वाले दाखिले मामले के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगे।
हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीएमई) ने संशोधित काउंसलिंग कार्यक्रम और सीट मैट्रिक्स जारी किया है। पहले चरण में घोषित सीट आवंटन को रद्द कर अभ्यर्थियों को संशोधित प्रक्रिया में दोबारा शामिल होने का अवसर दिया गया है। संशोधित कार्यक्रम के तहत च्वाइस फिलिंग और लॉकिंग 18 सितंबर से 21 सितंबर तक निर्धारित की गई है।
इस बीच आरक्षण व्यवस्था को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। बसपा प्रमुख मायावती ने राज्य सरकार से हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की मांग की है। उनका कहना है कि संबंधित मेडिकल कॉलेजों की स्थापना में अनुसूचित जाति कल्याण से जुड़ी विशेष घटक योजना की धनराशि का इस्तेमाल हुआ था।
अब अभ्यर्थियों की नजर संशोधित सीट मैट्रिक्स, काउंसलिंग कार्यक्रम और आरक्षण से जुड़े मामले की आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर है। यूपी नीट की आधिकारिक वेबसाइट पर काउंसलिंग से संबंधित संशोधित मेरिट सूची, सीट मैट्रिक्स और अन्य नोटिस उपलब्ध कराए गए हैं।






