नई दिल्ली
वाहनों के थर्ड पार्टी मोटर बीमा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने नई कारों के लिए थर्ड पार्टी बीमा की अवधि चार साल और नए दोपहिया वाहनों के लिए छह साल निर्धारित करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने ‘नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल’ व्यवस्था लागू करने की दिशा में पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) को वाहनों के बीमा विवरण को डिजिटल डेटाबेस से जोड़ने के निर्देश दिए हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पेट्रोल पंपों पर वाहन में वैध थर्ड पार्टी बीमा होने की जांच की जा सकेगी। इसके अलावा भविष्य में हाईवे पर लगे ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरों को भी बीमा डेटाबेस से जोड़े जाने की योजना है।
अदालत ने संसदीय समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि देश में करीब 30.48 करोड़ वाहन पंजीकृत हैं, जबकि लगभग 16.54 करोड़ वाहन वैध बीमा के बिना सड़कों पर चल रहे हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या दोपहिया वाहनों की है।
सुप्रीम कोर्ट का जोर सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को समय पर मुआवजा दिलाने और बिना वैध बीमा वाहनों के संचालन पर प्रभावी रोक लगाने पर है। प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने के बाद वाहन मालिकों के लिए थर्ड पार्टी बीमा को लेकर अनुपालन और अधिक जरूरी हो जाएगा।







