सहारनपुर से शार्पदृष्टि की रिपोर्ट
देवबंदी मौलाना कारी इसहाक गोरा ने मुसलमानों से धार्मिक सीमाएं बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि दूसरे धर्मों की पूजा-पद्धतियों या रस्मों में शामिल होना इस्लाम में जायज़ नहीं है। इसे भाईचारे का नाम देना गलत है, क्योंकि यह ईमान (आस्था) की कमजोरी और नफाक (दिखावा या पाखंड) है।इस बयान से गंगा जमुनी तहजीब की बात करने वाले लोगो को इसपर जरूर ध्यान देना चाहिए।
मौलाना इसहाक गोरा ने कहा कि आज के समय में लोग धर्मनिरपेक्षता और भाईचारे के नाम पर अपने धार्मिक सिद्धांतों को भूलते जा रहे हैं। यह चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि इस्लाम दूसरों के धर्म का सम्मान करने की शिक्षा देता है, लेकिन अपनी धार्मिक सीमाओं को लांघने की अनुमति नहीं देता। मौलाना ने मुसलमानों से अपील की कि वे इस्लाम की शिक्षाओं पर अमल करें और अपने इमान को मजबूत बनाए रखें। उन्होंने कहा कि समाज में शांति और सौहार्द बनाए रखना जरूरी है, लेकिन इसके लिए अपने धार्मिक सिद्धांतों से समझौता नहीं किया जा सकता।





