कोटकम्हरिया से श्रीनरायन गुप्ता
गोवर्धन पर्व पर जब पूरा देश गौसेवा और अन्नकूट का पर्व मना रहा है, तभी कोटकम्हरिया गोसदन की दयनीय तस्वीरें सवाल खड़े कर रही हैं।
गोवर्धन पूजा के अवसर पर देशभर में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना के साथ गौसेवा का उत्सव मनाया जा रहा है। मंदिरों और घरों में अन्नकूट के भोग लगाए जा रहे हैं, गायों को गुड़-चना और हरा चारा खिलाया जा रहा है। लेकिन इसी बीच कोटकम्हरिया स्थित गोसदन से आई तस्वीरें मन को झकझोर देने वाली हैं।
सूत्रों के अनुसार, यहाँ गौमाताएँ सूखे भूसे पर ही गुज़ारा करने को मजबूर हैं।कई गायों के शरीर पर हड्डियाँ तक झलक रही हैं। गोसदन में चारे-पानी की भारी कमी बताई जा रही है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि गोसदन प्रबंधन की लापरवाही से हालात इतने बिगड़े हैं कि कई गौमाताओं की हालत नाज़ुक बनी हुई है।एक ग्रामीण ने बताया,“सरकार गोवर्धन पूजा पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन असली गौसेवा यहाँ सूखे भुसे से गायों के आँसुओं में दिख रही है।”इस पूरे मामले में पशुपालन विभाग और स्थानीय प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
क्या केवल पर्व के दिन प्रतीकात्मक पूजा ही पर्याप्त है,या फिर असली गौसेवा उन गोसदनों में करनी चाहिए जहाँ गायें आज भी हरा चारा दाना के अभाव से जूझ रही हैं?जब एक ओर गोवर्धन पर्व का संदेश ‘अन्न से सेवा और प्राणीमात्र के प्रति करुणा’ है, वहीं कोटकम्हरिया गोसदन की हकीकत इस संदेश को आईना दिखा रही है।







