मुंबई
बॉम्बे हाई कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के एक मामले में दोषी ठहराए गए आरोपी की उम्रकैद की सजा घटाकर 12 साल कर दी है। अदालत ने सजा में राहत देते हुए आरोपी की उम्र, आपराधिक पृष्ठभूमि और जेल में उसके आचरण को आधार बनाया।
कोर्ट ने कहा कि अपराध के समय आरोपी की उम्र केवल 20 साल थी और उसका कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। वह वर्ष 2016 से लगातार जेल में बंद है। इसके अलावा, जेल में रहते हुए उसने शिक्षा से जुड़ी गतिविधियों में हिस्सा लिया, जिनमें महात्मा गांधी पर लिखा गया निबंध भी शामिल है। अदालत ने इन गतिविधियों को आरोपी के सुधार की दिशा में सकारात्मक कदम माना।
हाई कोर्ट की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले में 12 साल की सजा न्याय के उद्देश्य को पूरा करने के लिए पर्याप्त होगी। साथ ही, आरोपी द्वारा पहले से जेल में बिताई गई अवधि को इस सजा में समायोजित किया जाएगा।
हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नाबालिग से जुड़े यौन अपराध बेहद गंभीर होते हैं, लेकिन सजा तय करते समय आरोपी के सुधार की संभावना और परिस्थितियों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।




