लक्ष्मीपुर महराजगंज श्रीनरायन गुप्ता
पीएम श्री कम्पोजिट विद्यालय बेलवा खुर्द क्षेत्र लक्ष्मीपुर में आयोजित पारम्परिक लोकगीत कार्यशाला के अष्टम दिवस बुधवार को बच्चों को भारतीय लोकसंस्कृति से जुड़े अन्नप्राशन एवं गोदना संस्कारों पर आधारित पारम्परिक गीतों का प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही पूर्व दिवसों में सिखाए गए गीतों का पुनः अभ्यास भी कराया गया, जिससे बच्चों की प्रस्तुति और अधिक प्रभावशाली एवं सुसंगठित बन सके।
कार्यशाला में बच्चों ने पूरे उत्साह और रुचि के साथ भाग लिया। गीत, संगीत और लोकपरम्पराओं से सुसज्जित इस कार्यक्रम ने बच्चों को न केवल मनोरंजन प्रदान किया बल्कि उन्हें अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने और उससे जुड़ने का अवसर भी दिया। बच्चों के चेहरों पर उत्साह और प्रसन्नता स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थी। सुर और ताल के अनूठे संगम ने पूरे वातावरण को आनंदमय बना दिया, जिससे उपस्थित सभी लोग प्रफुल्लित और आह्लादित नजर आए।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक डॉ. प्रभुनाथ गुप्त ने बताया कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया, बाजारों तथा सार्वजनिक स्थलों पर फूहड़ और अश्लील गीतों का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है, जिसका समाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे समय में पारम्परिक लोकगीतों के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में यह कार्यशाला एक सार्थक पहल साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि लोकगीत हमारी संस्कृति और सामाजिक मूल्यों के संवाहक हैं तथा इनके माध्यम से बच्चों में नैतिकता, संस्कार और सांस्कृतिक चेतना का विकास होता है।
उन्होंने आगे बताया कि बच्चों में सीखने की अद्भुत ललक दिखाई दे रही है। कार्यशाला के प्रति बच्चों के साथ-साथ उनके अभिभावकों का भी विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। अभिभावक नियमित रूप से उपस्थित होकर बच्चों का उत्साहवर्धन कर रहे हैं तथा स्वयं भी लोकगीतों का आनंद ले रहे हैं। यह कार्यशाला बच्चों में लोकसंस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा पारम्परिक लोकगीतों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।
कार्यशाला में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले बच्चों में रंजना विश्वकर्मा, किरण, अनुष्का गुप्ता, सिंधु प्रजापति, शिवकुमार, अवधेश, श्याम गुप्ता, अर्जुन, अंजलि, रेनू, दीपशिखा, राधिका यादव, कामिनी, निरुपमा, शकुंतला तथा रागिनी प्रमुख रूप से शामिल रहीं। वहीं अभिभावकों में अमित, अमित चौधरी, विशाल, दिनेश यादव आदि लोग उपस्थित रहे।







