पटना
संसद में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने से रोके जाने के मुद्दे पर जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने केंद्र सरकार को घेरा है। मीडिया से बातचीत में प्रशांत किशोर ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका उतनी ही अहम होती है जितनी सत्ता पक्ष की।
उन्होंने कहा, “राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं। जब भी चुनाव होता है तो जनता सिर्फ सत्ता पक्ष का ही नहीं, बल्कि विपक्ष का भी चुनाव करती है। राहुल गांधी से आपका सरोकार हो या न हो, लोकतंत्र के लिए ज़रूरी है कि विपक्ष के नेता को बोलने से न रोका जाए।”
प्रशांत किशोर ने आगे कहा कि अगर राहुल गांधी सदन में कुछ कह रहे थे और सरकार को वह गलत लग रहा था, तो बोलने के बाद उसे रिकॉर्ड से हटाया जा सकता था। “बोलने देने से रोकना मुझे लगता है उचित नहीं है। यह लोकतंत्र के लिए घातक है,” उन्होंने कहा।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विपक्ष के नेता को सदन में बोलने का अधिकार है और इस मामले में सरकार से गलती हुई है।
जनरल मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब के अंश पढ़े जाने को लेकर उठे विवाद पर भी प्रशांत किशोर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “किताब पहले से मौजूद है, तभी तो उसे कोट किया गया है। सदन में राहुल गांधी जो बोल रहे थे, वह सीधे किताब के हवाले से नहीं, बल्कि एक मैगजिन में छपे उस आर्टिकल के संदर्भ में था, जिसमें उस किताब का उल्लेख किया गया था।”
प्रशांत किशोर के इस बयान के बाद संसद में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विपक्ष की भूमिका को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है।






