नयी दिल्ली
संसद में जेफ़री एपस्टीन से जुड़ी फ़ाइलों का ज़िक्र करते हुए हरदीप सिंह पुरी का नाम लिए जाने के बाद राजनीतिक विवाद तेज़ हो गया है। केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर सफ़ाई दी और कहा कि सदन की कार्यवाही के दौरान राहुल गांधी ने एपस्टीन फ़ाइलों के संदर्भ में उनका नाम लिया, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
पुरी ने बताया कि एपस्टीन से जुड़ी लगभग 30 लाख फ़ाइलें रिलीज़ हुई हैं और वे न्यूयॉर्क में आठ साल रहे। उन्होंने कहा कि 2009 से 2017 तक संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत रहने के दौरान, एक अंतरराष्ट्रीय संस्था इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (आईपीआई) से जुड़े कार्यक्रमों में वे एपस्टीन से तीन या चार बार मिले थे। पुरी के मुताबिक, यह मुलाक़ातें आधिकारिक थीं और एपस्टीन का आईपीआई या आईसीएम के कामकाज में कोई रोल नहीं था। उन्होंने यह भी दावा किया कि एपस्टीन से जुड़ा उनका कोई भी ईमेल संवाद सार्वजनिक है और उनका किसी ग़लत गतिविधि से कोई लेना-देना नहीं है।
हालांकि, पुरी की प्रेस कॉन्फ़्रेंस के बाद कांग्रेस ने उन पर हमला तेज़ कर दिया। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में छह सवाल उठाते हुए 4 अक्टूबर 2014 के एक ईमेल का हवाला दिया, जिसमें एपस्टीन और पुरी के बीच संवाद का ज़िक्र है। खेड़ा ने पूछा कि अगर संबंध सतही थे, तो एपस्टीन से क्यों कहा कि मेरे दोस्त, तुम तो चीज़ें उपलब्ध करवा देते हो. कोई सलाह?”
इसके बाद खेड़ा ने एक्स पर की गई पोस्ट में छह सवाल पूछे, ये सवाल थे –
एपस्टीन को रीड के साथ हरदीप की मुलाकात के बारे में पहले ही कैसे पता चल गया? क्या एपस्टीन ही वह “कॉन्टेक्ट” था जिसने रीड हॉफमैन के साथ मुलाकात करवाई थी? हरदीप उससे मुलाकात की जानकारी क्यों डिस्कस कर रहे थे? एपस्टीन को ‘दोस्त’ करके क्यों संबोधित किया गया? एपस्टीन हरदीप के लिए क्या ‘करवा’ रहा था? अगर उनका संबंध महज़ संयोगवश या सतही था, तो हरदीप एपस्टीन से ‘सलाह’ क्यों मांग रहे थे ?






