मथुरा/वृंदावन
वृंदावन के प्रसिद्ध श्री ठाकुर बांके बिहारी मंदिर की व्यवस्थाओं में किए गए बदलावों को लेकर गोस्वामी समाज और हाई पावर कमेटी के बीच विवाद गहराता जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और बेहतर दर्शन व्यवस्था के उद्देश्य से कमेटी द्वारा लिए गए फैसलों का गोस्वामी समाज ने कड़ा विरोध किया है।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित हाई पावर कमेटी ने हाल ही में मंदिर की व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए ठाकुर बांके बिहारी जी की प्रतिमा को गर्भगृह से निकालकर जगमोहन चबूतरा पर विराजमान करने का निर्णय लिया। साथ ही मंदिर परिसर में भीड़ नियंत्रण के लिए लाइन में दर्शन और स्टील रेलिंग लगाने के आदेश भी दिए गए।
बुधवार को मंदिर के द्वार खुलने से पहले ठाकुर जी को जगमोहन परिसर में विराजमान कर श्रद्धालुओं को दर्शन कराए गए, जिससे भक्तों को सुविधा मिली। हालांकि, इस व्यवस्था से गोस्वामी समाज नाराज हो गया। मंदिर दोपहर में बंद होने के बाद गोस्वामी समाज के लोगों ने जगमोहन परिसर में ताला डालकर नारेबाजी की और आरोप लगाया कि कमेटी परंपराओं के साथ मनमानी कर रही है।
कमेटी ने यह भी निर्णय लिया है कि 25 फरवरी से मंदिर के दर्शन की लाइव स्क्रीनिंग की जाएगी और मंदिर के खुलने-बंद होने के समय में बदलाव किया जाएगा। उद्देश्य यह है कि मंदिर के अंदर अत्यधिक भीड़ न हो और श्रद्धालु व्यवस्थित ढंग से दर्शन कर सकें।
हाई पावर कमेटी के अध्यक्ष अशोक कुमार ने कहा कि सभी सदस्यों की सहमति से यह फैसला लिया गया है। उनके अनुसार, ठाकुर जी का जगमोहन में विराजमान होना परंपरा के विपरीत नहीं है और इससे श्रद्धालुओं को बेहतर दर्शन का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि अच्छी व्यवस्थाओं से धक्का-मुक्की की स्थिति खत्म हुई है और इससे मंदिर की छवि भी बेहतर होगी।
वहीं, गोस्वामी समाज की ओर से जॉली गोस्वामी ने कमेटी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गर्भगृह की अपनी धार्मिक मर्यादा और अहमियत होती है। गर्भगृह ही ठाकुर जी का वास्तविक निवास है और उनके स्थान के साथ छेड़छाड़ स्वीकार नहीं की जा सकती।






