लखनऊ
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए उनके वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए हैं। कोर्ट ने यह कार्रवाई अपने पूर्व आदेशों का पालन न किए जाने पर की है।
मामले की सुनवाई जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस क़मर हसन रिज़वी की खंडपीठ ने की। अदालत ने टिप्पणी की कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बावजूद आदेशों का अनुपालन नहीं किया गया, जो न्यायिक प्रक्रिया की अवमानना के दायरे में आता है।
कोर्ट के इस आदेश के बाद अब मेयर के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार अस्थायी रूप से प्रभावहीन हो गए हैं। माना जा रहा है कि इस फैसले का असर नगर निगम के प्रशासनिक कामकाज और कई अहम परियोजनाओं पर पड़ सकता है।सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा ने पक्ष रखा। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिए कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।
इस फैसले के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे प्रशासनिक जवाबदेही से जोड़कर सरकार और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।






