अयोध्या
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की दैनिक गतिविधियों के व्यवस्थित और पेशेवर संचालन के लिए प्रस्तावित मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति प्रक्रिया अब अंतिम दौर में पहुंच गई है। इसी बीच अयोध्या के संत-महात्माओं ने सीईओ की नियुक्ति को लेकर आपत्ति जताते हुए सरकार और मंदिर ट्रस्ट से प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
संतों का कहना है कि श्रीराम मंदिर कोई औद्योगिक संस्थान या कॉरपोरेट प्रतिष्ठान नहीं है, जिसका संचालन सीईओ आधारित व्यवस्था से किया जाए। मंदिर की धार्मिक परंपराओं और रीति-रिवाजों को देखते हुए इसके संचालन में संत-महात्माओं की प्रमुख भूमिका होनी चाहिए।
इसी मुद्दे पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने भी सीईओ की नियुक्ति के बजाय संत-महात्माओं की संचालन समिति गठित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि धार्मिक रीति-रिवाजों और मंदिर की परंपराओं में सक्रिय रूप से शामिल संतों के पैनल की अगुवाई में मंदिर की व्यवस्था संचालित की जानी चाहिए।
उधर, मंदिर ट्रस्ट की ओर से सीईओ चयन प्रक्रिया जारी है। करीब 5200 आवेदनों में से 18 उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया था। अंतिम चरण में उत्तर प्रदेश और बिहार के दो वरिष्ठ रैंक के सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारियों को दूसरे दौर के साक्षात्कार के लिए बुलाए जाने की जानकारी है। अब देखना होगा कि ट्रस्ट संतों की आपत्तियों के बीच सीईओ नियुक्ति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है या संचालन व्यवस्था में बदलाव पर विचार करता है।







