नयी दिल्ली
उत्तर प्रदेश के चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस दाखिले के लिए करीब 91 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के 16 सितंबर के अंतरिम आदेश को चुनौती देते हुए प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की थी। सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने और तत्काल राहत देने की मांग की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। इससे फिलहाल हाईकोर्ट का आदेश प्रभावी रहेगा।
विवाद अंबेडकरनगर, कन्नौज, जालौन और सहारनपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में राज्य कोटे की एमबीबीएस सीटों पर लागू आरक्षण व्यवस्था को लेकर है। हाईकोर्ट ने करीब 91 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था पर रोक लगाते हुए काउंसलिंग को अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लागू व्यवस्था के तहत आगे बढ़ाने की अनुमति दी थी। इसके तहत एससी को 21 प्रतिशत, एसटी को दो प्रतिशत और ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण के आधार पर काउंसलिंग जारी रखने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, काउंसलिंग से होने वाले दाखिले अंतिम न्यायिक आदेश के अधीन रहेंगे।
मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के रुख पर भी सवाल उठाए थे। अदालत के समक्ष पूर्व में सरकार की ओर से 2026-27 सत्र से आरक्षण व्यवस्था को वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप लागू करने का आश्वासन दिए जाने का उल्लेख हुआ था। इसके बावजूद चारों कॉलेजों में आरक्षण का कुल अनुपात करीब 91 प्रतिशत पहुंचने पर याचिकाकर्ताओं ने आपत्ति जताई। हाईकोर्ट ने इसी मामले में अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा शिक्षा को व्यक्तिगत रूप से तलब कर आदेश और सरकार के आश्वासन के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट करने को कहा था।
उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार इन चारों कॉलेजों में राज्य कोटे की 85-85 सीटों में 62 सीटें एससी, पांच एसटी, 11 ओबीसी और सिर्फ सात सीटें अनारक्षित रखे जाने की व्यवस्था सामने आई थी। चारों कॉलेजों को मिलाकर 340 राज्य कोटे की सीटों में 248 एससी, 20 एसटी, 44 ओबीसी और 28 अनारक्षित सीटें थीं।
सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिलने के बाद चारों मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस दाखिले की प्रक्रिया फिलहाल हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के दायरे में रहेगी। अब इस विवाद में आगे की न्यायिक सुनवाई और अंतिम फैसला महत्वपूर्ण होगा।






