लखनऊ
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अभी से रणनीतिक तैयारियां शुरू कर दी हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार विधान परिषद (एमएलसी) के माध्यम से मंत्री बने नेताओं को विधानसभा चुनाव लड़ाने पर सहमति बन गई है। इसका उद्देश्य सरकार और संगठन के प्रमुख चेहरों को सीधे जनता के बीच स्थापित करना और चुनावी माहौल को मजबूत करना बताया जा रहा है।
प्रदेश सरकार में वर्तमान में पांच कैबिनेट मंत्री ऐसे हैं जो विधान परिषद के सदस्य हैं। पार्टी नेतृत्व इन सभी को विधानसभा चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा स्वतंत्र प्रभार वाले छह तथा राज्य मंत्री स्तर के तीन एमएलसी मंत्रियों को भी चुनाव लड़ाए जाने की संभावना है।
भाजपा संगठन के कई प्रमुख पदाधिकारियों को भी विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी को भी चुनावी मैदान में उतारने पर विचार चल रहा है। माना जा रहा है कि पिछड़ा वर्ग के बीच राजनीतिक संदेश देने और संगठनात्मक प्रभाव को चुनावी समर्थन में बदलने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण हो सकता है।
पार्टी की रणनीति कद्दावर नेताओं को सीधे चुनावी मैदान में उतारकर कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ाने और प्रदेशभर में सकारात्मक माहौल बनाने की है। हालांकि कुछ वरिष्ठ नेताओं को विशेष परिस्थितियों और संगठनात्मक जिम्मेदारियों के कारण चुनाव लड़ने से छूट मिल सकती है।
भाजपा नेतृत्व का मानना है कि सरकार और संगठन के प्रभावशाली चेहरों की चुनावी भागीदारी से 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को व्यापक राजनीतिक लाभ मिल सकता है।






