नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। CJP के चीफ स्पोक्सपर्सन सौरव दास ने प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए इसे युवाओं को लेबल करने वाला बयान बताया।
दास ने अपने वेरिफाइड X अकाउंट पर कहा कि सरकार से सवाल करने और नीतियों पर अपनी राय रखने वाले शिक्षित युवाओं को इस तरह संबोधित करना उचित नहीं है। उन्होंने इसे आलोचना और लोकतांत्रिक असहमति के प्रति असहिष्णुता करार दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से अपने संबोधन में नक्सलवाद का जिक्र करते हुए कहा कि सशस्त्र नक्सलवाद कमजोर हो रहा है, लेकिन ‘दिमागी नक्सल’ मानसिकता रखने वाले लोग हिंसा और अशांति के अवसर तलाशते हैं। उन्होंने ऐसे तत्वों को पहचानकर अलग करने की जरूरत बताई।
प्रधानमंत्री के बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई। समर्थकों ने इसे हिंसा और अस्थिरता फैलाने वाली विचारधारा के खिलाफ कड़ा संदेश बताया, जबकि आलोचकों का कहना है कि सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने वाले युवाओं को इस तरह का लेबल देना लोकतांत्रिक संवाद के लिए उचित नहीं है।





