लखनऊ से शार्पदृष्टि की रिपोर्ट
अच्छी बारिश के चलते इस वर्ष धान की पैदावार तो भरपूर हुई है, लेकिन किसानों को उसका उचित दाम नहीं मिल पा रहा है। जिले में सरकारी खरीद एक नवंबर से शुरू होनी है, मगर उससे पहले ही किसानों का हजारों क्विंटल धान बिचौलियों के हाथों औने-पौने दामों में बिक चुका है।
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हरदोई, लखीमपुर खीरी, सीतापुर जैसे जिलों में धान की खरीद पहले ही शुरू हो चुकी है। वहीं, लखनऊ में देरी से खरीद शुरू होने के कारण किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। सरकार ने इस बार धान का समर्थन मूल्य 2369 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जबकि छोटे व्यापारी किसानों से केवल 1600 से 1800 रुपये प्रति क्विंटल तक ही खरीद रहे हैं।
लखनऊ मंडी में सरकारी खरीद केंद्र न खुलने से आवक बेहद कम है। इसका फायदा बिचौलिये उठा रहे हैं। आसपास के बाजारों, खासकर बख्शी का तालाब (बीकेटी) क्षेत्र में हर दिन सैकड़ों क्विंटल धान औने-पौने दामों में बिक रहा है। बीते एक महीने में केवल बीकेटी इलाके से ही करीब 3000 क्विंटल धान खरीदा जा चुका है। बड़े ट्रकों में लदा यह धान बाहर के जिलों और राज्यों तक भेजा जा रहा है। किसानों का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द खरीद शुरू नहीं की तो उन्हें मजबूरन बिचौलियों के हवाले फसल बेचनी पड़ेगी। वे मांग कर रहे हैं कि खरीद केंद्र जल्द खोले जाएं और भुगतान प्रक्रिया पारदर्शी बनाई जाए।







