लक्ष्मीपुर से श्रीनरायन गुप्ता
बौद्ध धम्म गुरु एवं बौद्ध भिक्षु संघ के अध्यक्ष भदंत ज्ञानेश्वर का 90 वर्ष की आयु में शुक्रवार को लखनऊ के मेदांता अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया। उनके निधन की खबर से पूरे बौद्ध समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई।उनकी स्मृति में बनरसिहा कला के प्राचीन बौद्ध स्थल देवदह स्तूप परिसर में शनिवार को श्रद्धांजलि व प्रार्थना सभा आयोजित की गई। बौद्ध भिक्षुओं और अनुयायियों ने बुद्ध स्तूप की पूजा-अर्चना की तथा त्रिशरण और पंचशील का पाठ कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।देवदह रामग्राम बौद्ध विकास समिति के अध्यक्ष जितेंद्र राव ने कहा कि “भदंत ज्ञानेश्वर का जन्म म्यांमार में हुआ था, पर उन्होंने अपना अधिकांश जीवन भारत के कुशीनगर में बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार में समर्पित किया।”
वे म्यांमार बुद्ध विहार, कुशीनगर के पीठाधीश्वर भी थे और दशकों तक भगवान बुद्ध के करुणा, शांति और अहिंसा के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य करते रहे।भदंत ज्ञानेश्वर ने कुशीनगर को अंतरराष्ट्रीय बौद्ध पर्यटन केंद्र के रूप में पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
उनके योगदान के सम्मान में म्यांमार सरकार ने वर्ष 2023 में उन्हें देश के सर्वोच्च धार्मिक सम्मान ‘अभिध्वजा महारथा गुरु’ की उपाधि से सम्मानित किया था। यह सम्मान पाने वाले वे पहले भारतीय भिक्षु थे।कार्यक्र में उपस्थित भिक्षु एवं अनुयायियों ने कहा कि भदंत ज्ञानेश्वर की करुणा, विनम्रता और सेवा-भाव सदा प्रेरणा स्रोत रहेंगे।इस अवसर पर भंते नन्दरतन, भंते महिपाल, भंते प्रेमसागर, भंते धम्मवीर, धम्मशीला, भंते जीवक, भंते धर्मकृति, भंते कौटिल्य, जितेंद्र राव, प्रताप गौतम, रोहित गौतम, सन्तराम, अखिलेश, राममिलन, सुग्रीव सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।







