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उत्तर प्रदेश में समिजकल्याण कै चार अधिकारी बर्खास्त, तीन की पेंशन में कटौती 15 वर्ष पुराने घोटालों पर कार्रवाई

 

 

 

श्रावस्ती, मथुरा, शाहजहांपुर, हापुड़ और औरैया जिलों से मामले

 

लखनऊ की रिपोर्ट 

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार पर बड़ा प्रहार किया है। समाज कल्याण विभाग ने लंबे समय से लंबित मामलों में सख्त कदम उठाते हुए चार अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है, जबकि तीन सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन में स्थायी कटौती और वसूली का आदेश दिया गया है।

यह कार्रवाई समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण की निगरानी में हुई जांच के आधार पर की गई, जिसमें बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ। मंत्री ने सभी मामलों में एफआईआर दर्ज कर दोषियों से सरकारी धन की वसूली का निर्देश भी दिया है।

 

चार अधिकारियों की बर्खास्तगी

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श्रावस्ती की तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी मीना श्रीवास्तव (2008–2012) पर मुख्यमंत्री महामाया गरीब आर्थिक मदद योजना और छात्रवृत्ति योजनाओं में अनियमितताओं के आरोप सिद्ध हुए। उन्हें सेवा से बर्खास्त किया गया।

 

मथुरा के तत्कालीन डीएसडब्ल्यूओ करुणेश त्रिपाठी ने 11 अमान्य निजी संस्थानों को 2.53 करोड़ रुपये जारी किए और फर्जी छात्रों को दाखिला दिखाकर घोटाला किया। उनके खिलाफ बर्खास्तगी के साथ 19.25 करोड़ रुपये की वसूली का आदेश हुआ।

 

हापुड़ के तत्कालीन अधिकारी संजय कुमार ब्यास ने 2012–13 में डेबिट अथॉरिटी लेटर लेकर छात्रवृत्ति राशि सीधे संस्थानों को भेजी, जिससे 2.74 करोड़ रुपये की अनियमितता हुई। उन्हें बर्खास्त करते हुए 3.23 करोड़ रुपये की वसूली का निर्देश दिया गया।

 

शाहजहांपुर के तत्कालीन अधिकारी राजेश कुमार ने वृद्धावस्था पेंशन योजना के लाभार्थियों के बैंक खाते बदलकर अपात्रों को भुगतान किया। उनके खिलाफ बर्खास्तगी और 2.52 करोड़ रुपये की वसूली का आदेश हुआ।

 

 

सेवानिवृत्त अधिकारियों पर भी कार्रवाई

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भगवान

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(पूर्व डीएसडब्ल्यूओ, औरैया) ने 251 लाभार्थियों के खाते बदलकर 33.47 लाख रुपये की हेराफेरी की। उनके देयकों से 20 लाख रुपये की वसूली और पेंशन से 10% स्थायी कटौती का आदेश हुआ।

 

विनोद शंकर तिवारी

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(पूर्व डीएसडब्ल्यूओ, मथुरा) पर 11 अमान्य संस्थानों को करोड़ों रुपये देने और फर्जी छात्रों को छात्रवृत्ति दिलाने के आरोप सिद्ध हुए। उनकी पेंशन से 50% स्थायी कटौती और 1.96 करोड़ रुपये की वसूली का आदेश हुआ।

उमा शंकर शर्मा (पूर्व डीएसडब्ल्यूओ, मथुरा) ने स्वीकृत सीटों से 5526 अधिक छात्रों को फर्जी भुगतान कराया। उनकी पेंशन से 50% कटौती और 88.94 लाख रुपये की वसूली का निर्देश जारी किया गया।

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