पपटना विहार
भारतीय जनता पार्टी को जितना भी मिल जाए बिहार में रहना अपूर्ण ही है, 2025 के जनादेश में एनडीए के साझीदारों के बीच सत्ता, मंत्रालय और विभागों को सीएम नीतीश कुमार ने बीजेपी को जेडीयू से कमतर बराबर के बजाय 21 रखा है । बीजेपी के मंत्री अधिक बने और गृह राजस्व जैसे महत्वपूर्ण विभाग भी बीजेपी को मिले हैं। लेकिन अतृप्ति के जन्मजात शिकार राइट विंग बीजेपी नेताओं के बिहार में ताजा इस स्थिति को ऐसे समझा जाय बीजेपी कोटे के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को गृह मंत्रालय मिला पर नामुराद बीजेपी खेमे का पटना से दिल्ली तक कहना है सामान्य प्रशासन तो बीजेपी को नहीं मिला इसलिए बीजेपी का LO पर पूरा नियंत्रण आना नही कहा जाना चाहिए, सीएम नीतीश का पावर गेम ही ऐसा है कि पुलिस कंट्रोल — सम्राट चौधरी (गृह)के पास लेकिन गृह संबंधित अखिल भारतीय सेवा के IAS/IPS अफसरों की पोस्टिंग–ट्रांसफर अब भी नीतीश कुमार के हाथों में रहेगी यानी फ़ील्ड में सम्राट चौधरी लेकिन फाइलों और अंतिम स्तर पर निर्णयों पर दस्तखत सीएम नीतीश कुमार के ही होंगे। बीजेपी के असंतुष्ट खेमे का कुतर्क है इस बार नीतीश ने गृह विभाग तो छोड़ा लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग GAD अपने पास रखकर पूरा सिस्टम वहीं से कंट्रोल में रखा।
GAD विभाग जो IAS/IPS की पोस्टिंग
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ट्रांसफर–प्रमोशन
अनुशासनात्मक एक्शन, रिपोर्टों को मंगाना और जांच बैठाना खत्म करना सबका अंतिम फैसला सीएम द्वारा ही तय किया जाता है।




