लखनऊ
उत्तर प्रदेश में खाद की किल्लत थमने का नाम नहीं ले रही है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही पूरे वर्ष प्रदेश में खाद की पर्याप्त उपलब्धता का दावा करते रहे, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों को कटघरे में खड़ा करती दिख रही है। पहली बार भाजपा सरकार के लगभग दस साल के कार्यकाल में ऐसा संकट देखने को मिल रहा है, जिसने किसानों को भीतर तक झकझोर दिया है।
250 रुपये प्रति बोरी वाली खाद किसानों को 500 रुपये तक देने के बाद भी नहीं मिल पा रही। सरकार की ओर से अखबारों में उपलब्धता के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन खेतों में खाद की कमी ने किसानों की कमर तोड़ दी है।
इसी बीच झांसी–बबीना क्षेत्र में खाद की किल्लत और तेज हो गई है। स्थानीय विधायक राजीव सिंह पारीछा ने डीएम मृदुल चौधरी को गंभीर शिकायत भेजी है, जिसमें उन्होंने समिति सचिवों पर खुलकर दलाली और अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। विधायक का आरोप है कि 270 रुपये वाली खाद को 500 रुपये में बेचा जा रहा है। किसानों से खुलेआम लूट जारी है जबकि व्यापारियों को जरूरत से ज्यादा सप्लाई दी जा रही है।
विधायक पारीछा ने पूरे प्रकरण में तत्काल और कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि किसानों को राहत मिल सके और जिम्मेदारों पर लगाम कसी जा सके। खाद संकट पर बढ़ता जनरोष सरकार की चिंता बढ़ा सकता है, क्योंकि किसान अब खुले तौर पर सवाल उठा रहे हैं कि आखिर प्रदेश में खाद की कमी कब खत्म होगी।





