महराजगंज से श्रीनरायन गुप्ता
मदरसा अरबिया सईदुल उलूम एक्मा डिपो लक्ष्मीपुर महराजगंज में आज अल्प संख्यक अधिकार दिवस मनाया गया,प्रोग्राम को संबोधित करते हुए मदरसा के प्रिंसिपल मौलाना सैयद अली निजामी ने कहा कि,राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने 18 दिसंबर को विश्व अल्पसंख्यक अधिकार दिवस मनाया, जो 1992 में धार्मिक, भाषाई, राष्ट्रीय या जातीय अल्पसंख्यकों से संबंधित व्यक्तियों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के वक्तव्य को अपनाने का प्रतीक है।

भारत में हर साल 18 दिसंबर को ‘अल्पसंख्यक अधिकार दिवस’ मनाया जाता है। इस दिन का मकसद अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों और सुरक्षा के बारे में लोगों को जागरूक करना है। साथ ही उनके हितों की रक्षा करना और उनकी समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया जाता है। यह दिवस संयुक्त राष्ट्र के 1992 के घोषणापत्र और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM) की स्थापना से जुड़ा है।यह खास दिन हमें याद दिलाता है कि देश में रहने वाले सभी अल्पसंख्यक समुदायों को उनके पूरे अधिकार मिलें। यह दिवस उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनके सामने आने वाली चुनौतियों को समझने का एक मौका देता है। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM) की स्थापना भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह आयोग अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए काम करता है। मदरसा अरबिया सईदुल उलूम के अध्यापक
नूरूलहुदा मिस्बाही ने कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है। अनुच्छेद 25 से 28 तक यह सुनिश्चित करते हैं कि हर कोई अपनी पसंद के धर्म को मान सकता है, उसका पालन कर सकता है और उसका प्रचार कर सकता है। यह स्वतंत्रता कुछ शर्तों के साथ आती है, जैसे कि यह सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के नियमों के दायरे में होनी चाहिए। इन अनुच्छेदों के कारण ही भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश कहलाता है, जहां सरकार सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार करती है।
रोजगार और शिक्षा में समान अवसर (अनुच्छेद 16): सार्वजनिक रोजगार और शिक्षा के मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान अवसर सुनिश्चित किए गए हैं, और अल्पसंख्यकों को इन अवसरों से वंचित नहीं किया जा सकता। यह अनुच्छेद सार्वजनिक रोजगार (सरकारी नौकरी) के मामलों में सभी नागरिकों को समान अवसर की गारंटी देता है, जिसमें धर्म, जाति, लिंग, वंश, जन्म स्थान या निवास के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा।
शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और प्रबंधन (अनुच्छेद 30): भारतीय संविधान का अनुच्छेद 30, धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों को अपनी संस्कृति और पहचान को सुरक्षित रखने के लिए अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने और उनका प्रबंधन करने का मौलिक अधिकार देता है। यह अधिकार उन्हें बराबरी का दर्जा देने के लिए है।
इस अवसर पर मदरसा के समस्त अध्यापक/ कर्मचारी एवं छात्र छात्राएं उपस्थित थे।







