लखनऊ
उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी भर्तियों में आरक्षण नियमों के सख्त और पूर्ण अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए कड़ा आदेश जारी किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रमुख सचिव (नियुक्ति एवं कार्मिक) एम. देवराज ने राज्य की सभी भर्ती प्रक्रियाओं में ऊर्ध्वाधर (Vertical) और क्षैतिज (Horizontal) आरक्षण व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
आदेश के अनुसार, उत्तर प्रदेश की सरकारी नौकरियों में कुल 60 प्रतिशत आरक्षण लागू रहेगा। इसके तहत अनुसूचित जाति (SC) को 21 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति (ST) को 2 प्रतिशत, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27 प्रतिशत और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा।
इसके अलावा क्षैतिज आरक्षण के अंतर्गत दिव्यांगजन, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रित, भूतपूर्व सैनिक और महिलाओं को नियमानुसार लाभ दिया जाएगा। उत्कृष्ट खिलाड़ियों को भी वर्ष 2022 की नियमावली और 1999 के शासनादेश के अनुसार आरक्षण की सुविधा मिलेगी।
यह आदेश हाल ही में लेखपाल भर्ती को लेकर उठे विवाद के बाद जारी किया गया है। पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि लेखपाल भर्ती में पिछड़ा वर्ग को पर्याप्त आरक्षण नहीं दिया गया। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद आरक्षण व्यवस्था में संशोधन किया गया, जिससे सरकार को आलोचना का सामना करना पड़ा था।
प्रमुख सचिव एम. देवराज ने स्पष्ट किया कि यह आदेश उत्तर प्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण) अधिनियम-1994, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षण अधिनियम-2020 और अन्य संबंधित नियमावलियों के आधार पर जारी किया गया है।
आदेश में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC), उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) और अन्य भर्ती बोर्डों को निर्देश दिए गए हैं कि वे भर्ती प्रस्तावों में आरक्षण वाली रिक्तियों की गणना का स्वयं पुनः परीक्षण करें। किसी भी तरह की विसंगति पाए जाने पर तुरंत सुधार कर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कहा है कि संविधान और आरक्षण रोस्टर के पालन में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार के इस कदम से सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता, न्याय और सामाजिक संतुलन सुनिश्चित होने की उम्मीद जताई जा रही है।






