लखनऊ
उत्तर प्रदेश में नया लेबर कोड बिल जल्द ही लागू करने की तैयारी की जा रही है। यह बिल केंद्र सरकार की ओर से लाया गया है, जिसमें राज्य के श्रम विभाग ने कुछ मामूली संशोधन किए हैं। इन संशोधनों के साथ तैयार बिल को 9 जनवरी को विधि विभाग को भेज दिया गया है। सरकार की योजना जनवरी माह में इस बिल पर आगे की प्रक्रिया पूरी कर इसके प्रकाशन की है।
सरकार ने इस बिल को लेकर आपत्तियां भी आमंत्रित की हैं। प्राप्त आपत्तियों का समाधान 45 दिनों के भीतर किया जाएगा, जिसके बाद बिल को अंतिम रूप देकर प्रकाशित किया जाएगा। प्रकाशन के बाद प्रदेश में नए लेबर कोड का पालन करना अनिवार्य होगा।
जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को एकीकृत कर चार श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) में बदल दिया है, जो 21 नवंबर 2025 से लागू हो चुके हैं। राज्यों को इन्हें लागू करने के लिए 90 दिनों का समय दिया गया है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश सरकार ने 22 दिसंबर को चार समितियों का गठन किया था, जिनकी रिपोर्ट 27 दिसंबर तक आनी थी। इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर श्रम विभाग ने संशोधित बिल विधि विभाग को भेजा है।
नए लेबर कोड में कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर कई अहम बदलाव किए गए हैं। अब कंपनियों के लिए कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य होगा, जिसमें सेवा शर्तें और वेतन का स्पष्ट विवरण शामिल रहेगा। फिक्स्ड टर्म इंप्लॉयमेंट के तहत ग्रेच्युटी का भी प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही सभी कर्मचारियों को ईपीएफ और ईएसआई का लाभ देना नियोक्ताओं की जिम्मेदारी होगी। कर्मचारियों का बेसिक वेतन अब कुल सैलरी का कम से कम 50 प्रतिशत होना अनिवार्य किया गया है।
इसके अलावा 40 वर्ष से अधिक आयु के कर्मचारियों के लिए हेल्थ चेकअप कराना कंपनियों के लिए अनिवार्य होगा। फैक्ट्री खोलने की प्रक्रिया भी आसान की गई है, क्योंकि अब एक ही लाइसेंस पूरे देश में मान्य होगा और अलग-अलग राज्यों में लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
नए लेबर कोड के तहत उद्योगों को इंस्पेक्टर राज से भी राहत मिलेगी। अब ‘इंस्पेक्टर’ की जगह ‘फैसिलिटेटर’ की व्यवस्था की गई है, जो मुकदमा चलाने के बजाय समझौता शुल्क (कंपाउंड फी) के जरिए मामलों का निपटारा करेंगे।
इसके साथ ही रिटर्न फाइलिंग की प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है। पहले जहां 78 रजिस्टर रखने होते थे, अब केवल आठ रजिस्टर ही पर्याप्त होंगे। इससे उद्योगों और कंपनियों को अनुपालन में काफी सहूलियत मिलने की उम्मीद है।







