लखनऊ
राजधानी में चाइनीज मांझे ने एक बार फिर जानलेवा रूप दिखाया है। बीते 24 घंटे के भीतर चाइनीज मांझे से जुड़ी दो अलग-अलग घटनाओं ने शहर को झकझोर कर रख दिया है। बुधवार को स्कूटी सवार युवक की गला कटने से मौत हो गई, जबकि गुरुवार को शहीद पथ पर एक रिटायर्ड फौजी का जबड़ा और चेहरा बुरी तरह कट गया। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पहली घटना बुधवार दोपहर हैदरगंज चौराहे से तालकटोरा मिल एरिया जाने वाले फ्लाईओवर पर हुई। स्कूटी से जा रहे मो. शोएब (33) के गले में अचानक चाइनीज मांझा फंस गया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। शोएब दवा कंपनी में मेडिकल रिप्रजेंटेटिव थे और दुबग्गा की सीते विहार कॉलोनी के रहने वाले थे। वे अपने पीछे 75 वर्षीय बुजुर्ग मां, पत्नी और दो मासूम बच्चियों को छोड़ गए। शोएब परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे।
दूसरी घटना गुरुवार को शहीद पथ पर हुई, जहां स्कूटी से घर लौट रहे रिटायर्ड फौजी बृजेश राय चाइनीज मांझे की चपेट में आ गए। मांझा उनके चेहरे और मुंह में उलझ गया, जिससे होंठ कट गया और चेहरे पर गहरा जख्म आया। बृजेश राय कैंसर हॉस्पिटल में सिक्योरिटी गार्ड के पद पर तैनात हैं और फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं।
एक मौत के बाद सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा है कि चाइनीज मांझे से होने वाली मौतों को हत्या माना जाएगा। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और राजधानी में पतंग व मांझा बेचने वाली दुकानों पर छापेमारी शुरू कर दी गई।
लखनऊ के ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर बबलू कुमार ने सभी डीसीपी और थाना क्षेत्रों को तीन दिन तक विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। गुरुवार को पुलिस ने कई इलाकों में छापेमारी भी की, लेकिन इसी दौरान शहीद पथ पर दूसरी गंभीर घटना हो गई।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 में हाईकोर्ट द्वारा चाइनीज मांझे के प्रयोग पर रोक लगाए जाने के बावजूद इसकी बिक्री आखिर कैसे हो रही है। समय-समय पर अभियान तो चलाए जाते हैं, लेकिन स्थायी रूप से बिक्री पर लगाम नहीं लग पा रही है।
इन घटनाओं के बाद लोगों में भारी आक्रोश है। आम जनता का कहना है कि चाइनीज मांझे की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके।





