लखनऊ
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के लखनऊ विश्वविद्यालय पहुंचते ही परिसर में विरोध शुरू हो गया। वह संघ के शताब्दी समारोह के तहत आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने विश्वविद्यालय आए थे। उनके आगमन की सूचना मिलते ही कुछ छात्र संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और “गो बैक” के नारे लगाए।
विरोध कर रहे छात्रों का कहना था कि विश्वविद्यालय शैक्षणिक संस्थान है और यहां राजनीतिक या वैचारिक संगठनों के कार्यक्रम नहीं होने चाहिए। देखते ही देखते विरोध तेज हो गया, जिससे परिसर में तनाव की स्थिति बन गई। हालात को नियंत्रित करने के लिए मौके पर मौजूद पुलिस बल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रदर्शन कर रहे कई छात्रों को हिरासत में ले लिया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख के दौरे को लेकर पहले से ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। विश्वविद्यालय परिसर और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात रहा। प्रशासन की ओर से कहा गया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठाए गए हैं।
इस घटना के बाद लखनऊ विश्वविद्यालय का परिसर पूरी तरह सियासी चर्चा का केंद्र बन गया। छात्र संगठनों और प्रशासन के बीच इसे लेकर बहस भी तेज हो गई है। वहीं, संघ के शताब्दी समारोह को लेकर समर्थकों में उत्साह देखा गया, जबकि विरोधी गुटों ने इसे विश्वविद्यालय की मर्यादा से जोड़कर सवाल उठाए।
संघ प्रमुख के इस दौरे ने लखनऊ के शैक्षणिक और राजनीतिक माहौल में एक बार फिर गर्मी ला दी है। स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है और परिसर में फिलहाल अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।






