नई दिल्ली
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई का बुधवार सुबह निधन हो गया। जानकारी के अनुसार, उन्होंने सुबह करीब 4 बजे अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से पूरे देश के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है।
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले की रहने वाली मोहसिना किदवई ने राजनीतिक सीढ़ियां 1970 से चढ़ना शुरू की थी। वर्ष 1970 में उन्हें पहली बार लखनऊ बाराबंकी लोकल बॉडी से विधान परिषद का सदस्य बनाया गया। वर्ष 1974 में बाराबंकी की दरियाबाद विधानसभा सीट से विधानसभा का चुनाव लड़ा और पहली बार विधानसभा की सदस्य निर्वाचित हुई। 1977 के विधानसभा चुनाव में जब पूरे देश में कांग्रेस के विरूद्ध आपातकाल के विरोध में माहौल चल रहा था। उसमें मोहसिना
किदवई भी चुनाव हार गई। इसके बाद 1978 में आजमगढ़ से लोकसभा सीट से चुनाव लड़ी और करीब 36,000 मतों से चुनाव जीत गई थी।
मोहसिना किदवई लंबे समय तक सक्रिय राजनीति में रहीं और उन्होंने अपने कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं में गिनी जाती थीं। उनके राजनीतिक जीवन की पहचान उनकी सादगी, प्रतिबद्धता और जनसेवा के प्रति समर्पण से रही।
किदवई ने केंद्र सरकार में मंत्री के रूप में विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी संभाली थी। इसके अलावा, वे कई बार संसद की सदस्य भी रहीं और जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाती थीं। खासतौर पर अल्पसंख्यक और महिला सशक्तिकरण के मुद्दों पर उनकी सक्रिय भूमिका रही।
उनके निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है। कांग्रेस नेताओं के साथ-साथ अन्य दलों के नेताओं ने भी उन्हें एक अनुभवी, संतुलित और सौम्य नेता के रूप में याद किया। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
मोहसिना किदवई के निधन से भारतीय राजनीति को एक अपूरणीय क्षति हुई है। उनका योगदान और उनकी राजनीतिक विरासत लंबे समय तक याद की जाएगी।






