भुवनेश्वर
शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी। शनिवार को भुवनेश्वर की जीएम यूनिवर्सिटी में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि Gen-Z हमारे ही बच्चे हैं। कुछ लोगों ने उन्हें भटकाने की कोशिश की, लेकिन देश के युवाओं की क्षमता पर उन्हें पूरा भरोसा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चर्चा के बाद ही उन्होंने मंत्री पद छोड़ा।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भारत में हर वर्ष करीब दो करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं। पिछले एक दशक में लगभग 20 करोड़ बच्चे देश की युवा आबादी का हिस्सा बने हैं। इन युवाओं के बड़े सपने हैं और यही युवा भारत को विश्व गुरु बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि उनके लिए मंत्री पद से ज्यादा महत्वपूर्ण देश और युवा पीढ़ी है।
कार्यक्रम के दौरान बीजू जनता दल (बीजद) कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी भी की। प्रधान ने 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था। यह घटनाक्रम NEET पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के 35वें दिन के बाद हुआ।
29 साल पहले भी पेपर लीक के खिलाफ उतरे थे सड़क पर
धर्मेंद्र प्रधान का पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन से पुराना जुड़ाव भी सामने आया है। उनके पूर्व सहयोगी प्रशांत राउत के अनुसार, 1997 में ओडिशा में पेपर लीक के विरोध में प्रधान ने छात्रों के साथ प्रदर्शन किया था। इस आंदोलन में करीब 1,500 छात्र शामिल हुए थे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया था, जिसमें प्रधान को भी चोटें आई थीं। बताया जाता है कि उनके शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोट लगी और फ्रैक्चर भी हुआ था।
करीब तीन दशक पहले पेपर लीक के खिलाफ सड़क पर उतरने वाले प्रधान को बाद में केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में NEET पेपर लीक विवाद का सामना करना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम ने उनके राजनीतिक सफर के एक पुराने अध्याय को फिर चर्चा में ला दिया है।







