लखनऊ
सहारा ग्रुप के कर्मचारियों के भविष्य निधि (पीएफ) की रकम जमा न करने के मामले में लखनऊ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त (ईपीएफओ) कार्यालय, लखनऊ की ओर से एसीजेएम कोर्ट के आदेश के बाद अलीगंज थाने में यह मुकदमा दर्ज कराया गया है। एफआईआर का क्राइम नंबर 161/2026 है। मामले में सहारा ग्रुप के पीएफ ट्रस्टी ओपी श्रीवास्तव समेत छह अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है।
आरोप है कि सहारा ग्रुप ने हजारों कर्मचारियों के वेतन से करोड़ों रुपये की पीएफ राशि की कटौती की, लेकिन कटौती की रकम के साथ ही नियोक्ता की ओर से जमा किया जाने वाला अंश भी संबंधित ईपीएफओ कार्यालय में जमा नहीं कराया गया। इससे कर्मचारियों के पीएफ खातों में रकम जमा नहीं हो सकी।
मामले को लेकर ईपीएफओ कमिश्नर की ओर से सहारा ग्रुप को कई बार नोटिस जारी कर कर्मचारियों के वेतन से काटी गई पीएफ राशि और कंपनी के हिस्से की रकम संबंधित खातों में जमा करने के निर्देश दिए गए। आरोप है कि नोटिस का संतोषजनक जवाब देने के बजाय सहारा ग्रुप ने कोर्ट का रुख कर स्टे हासिल कर लिया।
इसके बाद ईपीएफओ की ओर से कानूनी प्रक्रिया अपनाते हुए कोर्ट से स्टे खारिज कराया गया और पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की गई। हालांकि, पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज नहीं किया। इसके बाद ईपीएफओ कमिश्नर ने एसीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया।
करीब चार माह तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामले में सख्त टिप्पणी करते हुए एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। कोर्ट के आदेश के अनुपालन में शनिवार को अलीगंज पुलिस ने सहारा ग्रुप के पीएफ ट्रस्टियों समेत छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अब एफआईआर में लगाए गए आरोपों, कर्मचारियों के वेतन से काटी गई पीएफ राशि और ईपीएफओ में जमा नहीं की गई रकम से संबंधित दस्तावेजों की जांच करेगी।







