लखनऊ
कर्मचारियों के वेतन से पीएफ की रकम काटने के बाद उसे भविष्य निधि कार्यालय में जमा नहीं कराने के मामले में अलीगंज थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद सहारा समूह में हलचल बढ़ गई है। एफआईआर के बाद पीएफ से जुड़े ट्रस्टी गिरफ्तारी से बचने के लिए भूमिगत हो गये हैं। वहीं, सहारा प्रबंधन ने अपने बचाव में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
सहारा प्रबंधन की ओर से दाखिल आईए में कहा गया है कि कर्मचारियों के बकाया वेतन और अन्य देनदारियों की सूची सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जा चुकी है। सहारा प्रबंधन का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कर्मचारियों के बकाये का भुगतान होने के बाद उसी प्रक्रिया के तहत पीएफ की बकाया रकम भी उपलब्ध कराई जाएगी।
सहारा के इस दावे पर पीएफ विभाग ने कड़ी आपत्ति जताई है। पीएफ विभाग का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई सूची में कर्मचारियों के बकाया पीएफ का कोई उल्लेख नहीं है। इसलिए केवल सुप्रीम कोर्ट से धनराशि मिलने का हवाला देकर पीएफ की देनदारी से बचा नहीं जा सकता।
विभाग ने स्पष्ट किया कि वेतन से काटी गई पीएफ राशि कर्मचारियों की जमा रकम है और उसे निर्धारित समय पर पीएफ खाते में जमा करना नियोक्ता की जिम्मेदारी है। सहायक आयुक्त ने कहा कि एफआईआर के बाद पुलिस की कार्रवाई पर विभाग की नजर है।






