लखनऊ
उत्तर प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए पहली बार फेस रिकॉग्निशन सिस्टम (Facial Recognition System) का उपयोग किया गया है। राज्य चुनाव आयोग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित इस तकनीक को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में पंचायत चुनावों और नगर पंचायत उपचुनावों में लागू किया।
इस प्रणाली के तहत मतदान केंद्रों पर वोटर की लाइव फोटो को उसके वोटर आईडी और चुनाव आयोग के डेटाबेस से मिलाकर उसकी पहचान सत्यापित की जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य फर्जी मतदान को रोकना, डुप्लीकेट वोटर एंट्री को पकड़ना और पूरी मतदान प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित व भरोसेमंद बनाना है।
यह पहली बार है जब उत्तर प्रदेश में चुनावी प्रक्रिया के दौरान इस स्तर पर फेस रिकॉग्निशन तकनीक का उपयोग किया गया है। हालांकि इससे पहले देश के कुछ राज्यों, जैसे तेलंगाना में सीमित स्तर पर इसके ट्रायल किए जा चुके हैं, लेकिन यूपी में इसे बड़े पैमाने पर लागू करने की शुरुआत मानी जा रही है।
वर्तमान में यह तकनीक ट्रायल मोड में है, लेकिन 2026 में होने वाले आगामी पंचायत चुनावों में इसके व्यापक उपयोग की तैयारी की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और सटीकता दोनों बढ़ सकती हैं।





