लखनऊ
सोमवार को आयोजित पुलिस भर्ती परीक्षा की पहली पाली में प्रश्नपत्र के हिंदी और गणित अनुभाग ने अभ्यर्थियों की खूब परीक्षा ली। तार्किक क्षमता, मुहावरे, लोकोक्तियां, अलंकार तथा गणितीय पहेलियों से जुड़े सवालों ने परीक्षार्थियों को उलझन में डाल दिया। वहीं अंग्रेजी वर्णमाला और शब्दकोष आधारित प्रश्नों ने भी उम्मीदवारों की परेशानी बढ़ा दी।
परीक्षार्थियों के अनुसार प्रश्न कठिन नहीं थे, लेकिन निर्धारित समय में उनका उत्तर देना चुनौतीपूर्ण रहा। कई ऐसे सवाल पूछे गए जिनमें तार्किक विश्लेषण और त्वरित गणना की आवश्यकता थी। उदाहरण के तौर पर, “सभी पिज्जा टॉपिंग हैं, कोई भी टॉपिंग स्वादिष्ट नहीं है” जैसे कथनों पर तार्किक निष्कर्ष निकालने, लोकोक्तियों और मुहावरों के अर्थ बताने तथा दिशा-ज्ञान से जुड़े प्रश्न पूछे गए। इसके अलावा गणित में प्रतिशत, गुणा-भाग और अनुपात संबंधी प्रश्नों की संख्या अधिक रही।
मेरठ से परीक्षा देने आए सुधांशु ने बताया कि प्रश्नपत्र का स्तर सामान्य था, लेकिन गणित के प्रश्नों में समय अधिक लग रहा था। गुणा-भाग और प्रतिशत के सवालों के कारण कई प्रश्नों को हल करने में अपेक्षा से ज्यादा समय लगा। उन्होंने कहा कि एक मिनट से कम समय में उत्तर देना कई बार मुश्किल साबित हुआ।
नगला पदी में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहीं दिव्या ने बताया कि उनकी परीक्षा दूसरी पाली में थी। पहली पाली का प्रश्नपत्र देखने के बाद उन्हें प्रश्नों के स्वरूप का अंदाजा हो गया था। उन्होंने बताया कि दूसरी पाली में भी लगभग उसी प्रकार के प्रश्न पूछे गए, हालांकि प्रश्नपत्र अपेक्षाकृत सरल था। दिव्या ने परीक्षा में सफलता की उम्मीद जताई।
कई अभ्यर्थियों ने बताया कि समय प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती रहा। कुछ प्रश्न केवल समय के अभाव में छूट गए। परीक्षा केंद्रों से बाहर निकलते समय उम्मीदवारों के बीच प्रश्नों और उनके संभावित उत्तरों को लेकर लंबी चर्चाएं होती रहीं।




