लखनऊ
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा है कि पुलिस थाने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बजाय व्यावसायिक गतिविधियों के केंद्र बनते जा रहे हैं। कोर्ट ने इस मामले में प्रदेश के डीजीपी को बलिया के रसड़ा थाने में तैनात एक कॉन्स्टेबल के कथित ट्रांसपोर्ट कारोबार की जांच कराने और 10 दिनों के भीतर कार्रवाई का हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने डीजीपी और अपर मुख्य सचिव (गृह) को बलिया के रसड़ा थाने में तैनात सभी पुलिस अधिकारियों और कॉन्स्टेबलों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के भी निर्देश दिए हैं।
मामला हरेंद्र यादव की उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें उनके ट्रक को एआरटीओ, बलिया द्वारा ब्लैकलिस्ट किए जाने को चुनौती दी गई थी। सुनवाई के दौरान संबंधित कॉन्स्टेबल ने स्वीकार किया कि उसने जीपीएफ से धन निकालकर अपने भाई के नाम पर याचिकाकर्ता के साथ ट्रांसपोर्ट व्यवसाय शुरू किया था और एक ट्रक खरीदा गया था।
कोर्ट ने पाया कि एआरटीओ ने वाहन को ब्लैकलिस्ट करने का निर्णय पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर लिया था। साथ ही, बलिया के पुलिस अधीक्षक ने अपने हलफनामे में यह नहीं बताया कि ड्यूटी के दौरान व्यवसाय करने वाले कॉन्स्टेबल के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि पुलिसकर्मी इसी तरह व्यवसाय में व्यस्त रहेंगे तो राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा। अदालत ने रसड़ा थाने में कथित व्यावसायिक गतिविधियों की विस्तृत जांच कराने का आदेश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को तय की है।






