लखनऊ/चंडीगढ़
उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की ईमानदार और जनोन्मुखी छवि ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। उनका दायित्व केवल कानून बनाना नहीं, बल्कि जनता के बीच विधायिका के प्रति विश्वास स्थापित करना भी है। जनता के प्रति प्रतिबद्धता ही लोकतंत्र की वास्तविक जीवनरेखा है।
महाना सोमवार को चंडीगढ़ में आयोजित कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन (सीपीए) जोन-2 के तीन दिवसीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी सशक्त और प्रभावी बन सकता है, जब जनप्रतिनिधि जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरें और उनके विश्वास को बनाए रखें। लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता बनाए रखना सभी जनप्रतिनिधियों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलन विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं के अध्यक्षों और संसदीय प्रतिनिधियों को अनुभव साझा करने का अवसर प्रदान करते हैं, जिससे संसदीय परंपराएं मजबूत होती हैं और विधायी कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी व जनोन्मुखी बनती है। अपने संबोधन में उन्होंने लोकतंत्र के समक्ष मौजूद समकालीन चुनौतियों, संस्थाओं की गरिमा, पारदर्शिता और जनविश्वास बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
सम्मेलन के दौरान महाना ने एक महत्वपूर्ण सत्र की अध्यक्षता भी की। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष समेत विभिन्न राज्यों के विधानसभा अध्यक्षों ने उनके नेतृत्व और कार्यशैली की सराहना की। महाना ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की विधायिका और अधिक सशक्त हुई है तथा प्रदेश ने विकास के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और विधायिका के बेहतर समन्वय से उत्तर प्रदेश सुशासन और प्रभावी लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली का आदर्श मॉडल बनकर उभरा है।





