महराजगंज
वन विभाग में स्थानांतरण आदेशों के बावजूद कुछ वनकर्मियों के कार्यमुक्त न होने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। विभागीय सूत्रों के अनुसार कई कर्मचारियों का तबादला पंद्रह दिन पहले हो चुका है, लेकिन वे अब भी पुराने कार्यस्थल पर जमे हुए हैं। इससे विभागीय पारदर्शिता और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्थानांतरण नीति का उद्देश्य प्रशासनिक निष्पक्षता बनाए रखना होता है, लेकिन आदेशों का पालन न होने से शासन की मंशा पर असर पड़ रहा है। वहीं विभाग के जिम्मेदार अधिकारी मामले पर स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आ रहे हैं।
सूत्रों का दावा है कि कुछ कर्मचारियों को प्रभावशाली संरक्षण मिलने के कारण स्थानांतरण आदेशों का अनुपालन नहीं हो पा रहा है। इससे अन्य कर्मचारियों में भी असंतोष व्याप्त है। कर्मचारियों का कहना है कि जब नियम सभी के लिए समान हैं तो कुछ लोगों को विशेष छूट क्यों दी जा रही है।
मामले को लेकर जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी उच्च अधिकारियों से जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि स्थानांतरण आदेशों का पालन नहीं कराया गया तो विभाग की कार्यप्रणाली की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। फिलहाल पूरे मामले को लेकर वन विभाग की भूमिका सवालों के घेरे में है।वही प्रभागीय वनाधिकारी महराजगंज निर्जन सूर्वे ने बताया कि मामला संज्ञान में है।अभी दूसरे डीवीजन के कर्मचारी नही आए है।जल्द ही वनकर्मियों को रिलीब कर ज्वाईन चरा दिया डाएगा।







