नोएडा
श्रमिक आंदोलनों को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी ने लेबर एजेंसियों और संविदाकारों के साथ बैठक में स्पष्ट किया कि किसी भी एजेंसी के श्रमिकों द्वारा उपद्रव करने पर संबंधित एजेंसी को ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर एजेंसी का लाइसेंस भी निरस्त किया जा सकता है।
बैठक का मुख्य उद्देश्य शासन की गाइडलाइंस का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करना और औद्योगिक शांति बनाए रखना था। डीएम ने कहा कि आउटसोर्सिंग एजेंसियां उद्योगों के संचालन और रोजगार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, इसलिए उन्हें अपने श्रमिकों के बीच अनुशासन बनाए रखना होगा।
इसके साथ ही श्रमिकों के अधिकारों पर भी जोर दिया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अकुशल श्रमिक को 13,690 रुपये, अर्धकुशल को 15,059 रुपये और कुशल श्रमिक को 16,868 रुपये प्रतिमाह वेतन मिलना अनिवार्य है। सभी संविदाकारों को निर्देश दिए गए हैं कि वे वेतन सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में जमा करें।
डीएम ने चेतावनी दी कि श्रमिकों का शोषण या नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित एजेंसियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।




