पटना
बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को लेकर नया सियासी सवाल खड़ा हो गया है। 18 जून को होने वाले बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए एनडीए के उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल कर दिया है, लेकिन सूची में दीपक प्रकाश का नाम शामिल नहीं है।
दीपक प्रकाश वर्तमान में बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री हैं, लेकिन वह न तो विधानसभा के सदस्य हैं और न ही विधान परिषद के। संविधान के प्रावधानों के अनुसार, किसी गैर-सदस्य को मंत्री बनाए जाने के बाद छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना अनिवार्य होता है, अन्यथा उसे मंत्री पद छोड़ना पड़ता है।
दीपक प्रकाश को 7 मई 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। इससे पहले 20 नवंबर 2025 को भी वह तत्कालीन सरकार में मंत्री बनाए गए थे, जबकि उस समय भी वह किसी सदन के सदस्य नहीं थे। इसी मुद्दे को लेकर उनकी नियुक्ति पर कानूनी और राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
बिहार विधान परिषद की रिक्त सीटों के लिए 18 जून को चुनाव होना है और नामांकन प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। ऐसे में दीपक प्रकाश के चुनावी मैदान से बाहर रहने के कारण उनके मंत्री पद पर संकट गहरा गया है।




