लखनऊ
एमबीबीएस दाखिले की काउंसिलिंग में आरक्षण लागू करने के तरीके को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को मंगलवार को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर पूर्व में जारी आदेशों के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने यह आदेश यूथ फॉर इक्वेलिटी फाउंडेशन की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अदालत के आदेश को प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों की काउंसिलिंग में लागू करने के बजाय केवल चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों तक सीमित रखा गया।
मामला अंबेडकरनगर, कन्नौज, जालौन और सहारनपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस प्रवेश से संबंधित है। पूर्व में अदालत ने इन कॉलेजों में करीब 91 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था पर रोक लगाते हुए 21 प्रतिशत एससी, दो प्रतिशत एसटी और 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के आधार पर काउंसिलिंग जारी रखने की अनुमति दी थी।
अदालत ने स्पष्ट किया था कि काउंसिलिंग के आधार पर होने वाले दाखिले अंतिम न्यायिक निर्णय के अधीन रहेंगे। अब कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव से सरकार के पूर्व आश्वासन और न्यायिक आदेशों के अनुपालन की स्थिति पर स्पष्ट जवाब मांगा है।






