अयोध्या
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़े कथित अनियमितताओं के आरोपों को लेकर अयोध्या एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। मंदिर निर्माण के लिए देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं द्वारा किए गए योगदान के मद्देनजर इस प्रकरण ने आम हिंदू समाज की भावनाओं को प्रभावित किया है। विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं स्थानीय लोगों द्वारा मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंदिर के चढ़ावे एवं दान सामग्री के लेखा-जोखा को लेकर उठे सवालों के बीच कुछ लोगों ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा, ट्रस्ट से जुड़े अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों तथा चंपत राय के चालक रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के नार्को टेस्ट की मांग की है। उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच से ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि मंदिर में प्राप्त बहुमूल्य दान सामग्री, सोना-चांदी तथा अन्य वस्तुओं के लेखा-जोखा को लेकर पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। हालांकि ट्रस्ट की ओर से पहले भी स्पष्ट किया जा चुका है कि किसी प्रकार की चोरी नहीं हुई है और संबंधित विषय ऑडिट एवं लेखांकन प्रक्रिया से जुड़ा मामला है।
इस बीच विपक्षी दलों द्वारा भी इस प्रकरण को लेकर सवाल उठाए गए हैं। कुछ सामाजिक संगठनों और धार्मिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे। वहीं ट्रस्ट समर्थकों का कहना है कि बिना जांच पूरी हुए किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं है।
मामले को लेकर कुछ लोगों ने रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव तथा उनके परिजनों की संपत्तियों, बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की जांच की भी मांग की है। उनका तर्क है कि यदि किसी व्यक्ति की संपत्ति में असामान्य वृद्धि हुई है तो उसकी जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा की जानी चाहिए।
विश्व हिंदू महासंघ के कुछ पदाधिकारियों ने भी पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) अथवा अन्य स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि श्रीराम जन्मभूमि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, इसलिए किसी भी प्रकार के संदेह का निष्पक्ष समाधान आवश्यक है।
फिलहाल मामले में जांच और प्रशासनिक कार्रवाई की प्रतीक्षा की जा रही है। आरोपों की सत्यता की पुष्टि किसी सक्षम जांच एजेंसी या न्यायालय द्वारा अभी तक नहीं की गई है। ऐसे में सभी पक्षों की बात सुनकर तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष निकालना ही उचित होगा।







